भारत में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा 18 जैवमंडल स्थापित किए गए हैं। ये जैवमंडल, राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य की तुलना में अधिक क्षेत्र में संरक्षण प्रदान करते हैं। ये प्राणियों और पेड़-पौधों के अलावा इनमें रह रही मानव जातियों को भी संरक्षण प्रदान करते हैं।
| वर्ष | जैवमंडल | राज्य |
|---|---|---|
| 1986 | नीलगिरी | तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल |
| 1988 | नंदा देवी | उत्तराखण्ड |
| 1988 | नोकरेक | मेघालय |
| 1989 | मन्नार की खाड़ी | तमिलनाडु |
| 1989 | सुंदरबन | पश्चिम बंगाल |
| 1989 | मानस | असम |
| 1989 | ग्रेट निकोबार | अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह |
| 1994 | सिमलीपाल | ओडिशा |
| 1997 | डिब्रू-सैखोवा | असम |
| 1998 | दिहांग-दिबांग | अरुणाचाल प्रदेश |
| 1999 | पचमढ़ी | मध्य प्रदेश |
| 2000 | कंचनजंघा | सिक्किम |
| 2001 | अगस्त्यमलाई | तमिलनाडु, केरल |
| 2005 | अचनकमर-अमरकंटक | मध्यप्रदेश, छतीसगढ़ |
| 2008 | कच्छ का रण | गुजरात |
| 2009 | शीत रेगिस्तान | हिमाचल प्रदेश |
| 2010 | शेषचलम पहाड़ियाँ | आंध्र प्रदेश |
| 2011 | पन्ना | मध्य प्रदेश |
इन 18 में से 11 जैवमंडल, मानव एवं जैवमंडल कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
| वर्ष | संरक्षित जैवमंडल |
|---|---|
| 2000 | नीलगिरी |
| 2001 | मन्नार की खाड़ी |
| 2001 | सुंदरबन |
| 2004 | नंदा देवी |
| 2009 | नोकरेक |
| 2009 | पचमढ़ी |
| 2009 | सिमलीपाल |
| 2012 | अचनकमर-अमरकंटक |
| 2013 | ग्रेट निकोबार |
| 2016 | अगस्त्यमलाई |
| 2018 | कंचनजंघा |


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