भारत के सभी राज्यों के विधायकों के मत की कीमत अलग-अलग होती है। मत की कीमत राज्य की जनसंख्या और विधानसभा सदस्यों की संख्या के अनुपात के आधार पर गिनी जाती है। 2017 के चुनावों में 1971 के समय की जनसंख्या व विधसभा सदस्यों की संख्या को आधार माना गया था।
गणना
राष्ट्रपति चुनाव में एक विधायक और सांसद के मत की कीमत एक सूत्र द्वारा निर्धारित की जाती है। उस राज्य की जनसंख्या को विधानसभा सीटों की संख्या से भाग किया जाता है। उसके बाद एक बार फिर 1000 से भाग किया जाता है। यदि दशमलव के बाद की संख्या 5 से अधिक है तो उस संख्या में 1 जोड़ दिया जाता है। प्राप्त संख्या, राज्य के एक विधायक के मत की कीमत दर्शाता है।
यदि मत की कीमत को कुल विधानसभा सदस्यों की संख्या से गुणा कर दिया जाए तो उस राज्य के सभी विधायकों के मतों की कीमत प्राप्त की जा सकती है।
सांसदों के मत की कीमत निकालने के लिए सभी प्रदेशों के विधायकों के मतों की कीमत को सांसदों की संख्या से विभाजित किया जाता है और मत की कीमत ज्ञात की जाती है। मत की कीमत को कुल सांसदों से गुणा करने पर कुल मतों की कीमत निकाली जा सकती है।
अब एक उदाहरण के माध्यम से समझने का प्रयत्न करते हैं। 1971 में हरियाणा राज्य की जनसंख्या 1,00,36,808 थी और विधानसभा सदस्यों की संख्या 90 थी। अतः एक विधायक के मत की कीमत 10036808/90 होगी जो 111520 होगा। अब इस संख्या को 1000 से भाग करने पर 111.5 प्राप्त होगा। चूँकि दशमलव के बाद की संख्या 5 या 5 से अधिक है तो 111 में 1 जोड़ दिया जाएगा। इस प्रकार हरियाणा के एक विधायक के मत की कीमत 112 होगी। 112 को विधानसभा सदस्यों की संख्या (90) से गुणा करने पर 10080 प्राप्त होगा जो राज्य के कुल मत की कीमत दर्शाता है।
इसी प्रकार भारत के सभी प्रदेशों के एक विधायक और पूरे प्रदेश के विधायकों के मत की कीमत ज्ञात की जा सकती है। सभी राज्यों के मत की कीमत जोड़ने पर 549495 प्राप्त होगा।
लोकसभा और राज्यसभा में निर्वाचित सांसदों की संख्या 543+233 + 776 है। अतः एक मत की कीमत राज्यों के मत की कीमत/सांसदों की संख्या अर्थात 549495/776 = 708 होगी। सभी सांसदों के मतों की कुल कीमत 708 x 776 = 549408 होगी।
कुल मतों की कीमत = 5,49,495 + 5,49,408 = 10,98,903
जिस प्रत्याशी को अधिक मत प्राप्त होंगे, वही विजेता होगा।


0 Comments